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काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने लाइट ऑफ बुद्धधर्म फाउंडेशन के साथ किया एमओयू

दोनों संस्थान बौद्ध विरासत एवं तीर्थयात्रा पर सम्मेलनों के आयोजन में आधिकारिक साझेदार बनेंगे

वाराणसी, 12 फरवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग और लाइट ऑफ बुद्धधर्म फाउंडेशन (एलबीडीएफआई) के मध्य शोध एवं शिक्षा के क्षेत्र में शैक्षणिक सहयोग के लिए गुरूवार को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया। यह हस्ताक्षर कार्यक्रम बीएचयू कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी तथा एलबीडीएफआई की निदेशिका वांगमो डिक्सी की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान बीएचयू से मनोज पांडेय एंव एलबीडीएफआई की तरफ से निदेशिका वांगमो डिक्सी ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया।

समझौते की शर्तों के अंतर्गत पालि विभाग और एलबीडीएफआई संयुक्त रूप से शैक्षणिक एवं सामुदायिक कार्यक्रमों के विकास, शोध परियोजनाओं के निर्माण, शैक्षणिक सूचनाओं के आदान-प्रदान, संकाय सदस्यों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के आदान-प्रदान तथा शिक्षण, शोध एवं परियोजनाओं से संबंधित कार्यक्रमों में संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। यह सहयोग बौद्ध दर्शन एवं संस्कृति, बौद्ध अध्ययन, अभिधम्म, बौद्ध मनोविज्ञान तथा बौद्ध धर्म से संबंधित अन्य पारस्परिक रुचि के विषयों सहित विविध अनुशासनों एवं अंतर्विषयक क्षेत्रों को समाहित करेगा।

 

इस अवसर पर कुलपति प्रो.चतुर्वेदी ने कहा कि बीएचयू बौद्ध विरासत एवं तीर्थयात्रा से संबंधित गतिविधियों में एक आधिकारिक शैक्षणिक साझेदार के रूप में कार्य करने तथा पूरे भारत में बौद्ध परंपराओं पर शोध को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने पालि के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को इस महत्त्वपूर्ण क्षेत्र में शोध करने के लिए प्रेरित किया तथा आश्वासन दिया कि बीएचयू अधिकतम संभव सहयोग प्रदान करेगा। वांगमो डिक्सी ने कहा कि हमारी सहयोगी संस्था सारनाथ इंटरनेशनल न्यिंगमा इंस्टीट्यूट, जो यहाँ से कुछ ही मील की दूरी पर स्थित है, तथा हमारा वैश्विक मुख्यालय, बर्कले कैलिफ़ोर्निया (यूएसए) में होने के कारण हम आने वाले वर्षों में सार्थक और गहन सहयोग की अपेक्षा करते हैं। दोनों संस्थानों ने बौद्ध विरासत एवं तीर्थयात्रा पर सम्मेलनों के आयोजन में आधिकारिक साझेदार के रूप में सहयोग करने पर सहमति व्यक्त की। यह साझेदारी भारत भर में बौद्ध तीर्थ परंपराओं एवं यात्राओं पर संयुक्त शोध को भी प्रोत्साहित करेगा। सहयोग का एक विशेष क्षेत्र बुद्ध वचनों के अंतर्संबंध पर केंद्रित होगा। बीएचयू के संकाय सदस्य, शोधार्थी एवं विद्यार्थी अंतरराष्ट्रीय त्रिपिटक पाठ परंपराओं का दस्तावेजीकरण, शोध तथा शैक्षणिक परिप्रेक्ष्य में विश्लेषण करेंगे, जिसमें पालि ध्वनिविज्ञान, पाठ-परंपराए शामिल होंगे। इस क्षेत्र में विशेष रूप से पालि एवं बौद्ध अध्ययन से संबंधित विशिष्ट अकादमिक शोध करने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए दोनों संस्थान संयुक्त रूप से शोध पहल का समर्थन करेंगे। बताते चले ‘लाइट ऑफ बुद्धधर्म फाउंडेशन’ भारत जो बुद्ध की पवित्र भूमि है, में बौद्ध संस्कृति एवं विरासत के पुनर्जागरण और संरक्षण के लिए समर्पित एक संस्था है। कार्यक्रम के दौरान कला संकाय की संकाय प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल, वित्त अधिकारी मनोज पांडेय, विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार यादव, प्रो. प्रीति कुमारी दुबे, डॉ. राजेश सिंह, पीआरओ, डॉ. बुद्ध घोष, डॉ. शैलेन्द्र कुमार सिंह, छात्र सलाहकार अंतरराष्ट्रीय केंद्र से विकास कुमार आदि की मौजूदगी रही।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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